अलवर गैंग रेप: मोबाइल में न रखें वायरल वीडियो, जाना पड़ सकता है, जेल!

अलवर गैंग रेप: मोबाइल में न रखें वायरल वीडियो, जाना पड़ सकता है, जेल!

राजस्थान के अलवर जिले के थानागाजी थाना क्षेत्र में दबंगों द्वारा दलित महिला के साथ गैंगरेप का वीडियो लगातार वायरल हो रहा है. जिसकी वजह से पीड़िता की पहचान साफ तौर पर उजागर हो रही है. नियमों के मुताबिक ऐसे वीडियो को किसी ओर को फॉरवर्ड करना कानूनी अपराध है. इस तरह का काम को आइपीसी की धारा 228 ए के साथ आइटी एक्ट की धारा 67 व 67ए के तहत अपराध माना गया है. इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर दो साल से 5 साल तक की सजा व 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. साथ ही गैंगरेप का वीडियो किसी शख्स के मोबाइल में पाये जाने पर पर उसके खिलाफ महिला अशिष्ट रूपण अधिनियम 1986 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है. जिसके लिए दो साल की सजा व दो हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है.
बता दें कि बीते 26 अप्रैल को एक दलित महिला पति के साथ ससुराल जा रही थी. रास्ते में कुछ दबंगों ने उसके पति को धमका कर महिला के साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया और अश्‍लील फोटो और वीडियो बनाकर धमकी देने लगे कि अगर किसी को इसकी जानकारी दी तो वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा.

क्या कहता है कानून-
धारा 228 ए- जो भी किसी रेप पीड़िता की पहचान या ऐसी सामग्री जिससे पीड़िता की पहचान उजागर होती हो, प्रकाशित करता है. वह धारा 228ए के अंतर्गत अपराधी है. इस धारा में दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है.
धारा 67 व 67ए-  कोई भी ऐसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जिसमें स्पष्टत: यौन संबंधी सामग्री, कृत्य अथवा व्यवहार से प्रदर्शित हो. पांच साल तक की सजा हो सकती है.
धारा 6 (महिला अशिष्ट रूपण अधिनियम 1986)- अगर कोई व्यक्ति किताब, पंपलैट, कागज स्लाइड, फिल्म्, लेख, ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफ में अशोभनीय रूप में महिला को दिखाते हुए उत्पादन करता है, विक्रय करता है, किराए पर देता है, बांटता है, डाक से भेजता है, तो यह धारा के तहत अपराध माना जाएगा. इसमें दो साल तक का कारावास और जुर्माने का प्रावधान है.

बता दें कि पुलिस ने बुधवार को सभी आरोपियों के नाम सार्वजनिक किए हैं. डीजीपी कपिल गर्ग ने बताया कि गैंग रेप के आरोपी छोटेलाल गुर्जर, अशोक गुर्जर, महेश गुर्जर, हंसराज गुर्जर और इन्द्राज गुर्जर हैं. इनमें इन्द्राज को 7 मई को गिरफ्तार कर लिया गया था.

बीते 26 अप्रैल को एक दलित महिला पति के साथ ससुराल जा रही थी. रास्ते में कुछ दबंगों ने उसके पति को धमका कर महिला के साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया और अश्‍लील फोटो और वीडियो बनाकर धमकी देने लगे कि अगर किसी को इसकी जानकारी दी तो वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा.

क्या कहता है कानून-
धारा 228 ए- जो भी किसी रेप पीड़िता की पहचान या ऐसी सामग्री जिससे पीड़िता की पहचान उजागर होती हो, प्रकाशित करता है. वह धारा 228ए के अंतर्गत अपराधी है. इस धारा में दो साल तक की कैद की सजा हो सकती है.धारा 67 व 67ए-  कोई भी ऐसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जिसमें स्पष्टत: यौन संबंधी सामग्री, कृत्य अथवा व्यवहार से प्रदर्शित हो. पांच साल तक की सजा हो सकती है.

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